Poem in hindi

​Poem in Hindi | समंदर-लहरें-कस्तियाँ

देखो इस समंदर को देखो,

इसे देखकर तुमने क्या देखा

एक अपार जलराशि

जिसकी लहरें मचल रही है

किसी दूसरे के सहारे उछल रही है

लगा रही अनावश्यक जोर

मचा रही बेमतलब शोर 

अल्हड़ हवा के सहारे

खा रही खुद ही पछाड़ें

मगर सागर को देखो

कैसे शांत है अंदर ही अंदर

इसलिए तो ये है समंदर

अपने बल पर हो जिसको भरोसा

वो ऐसे ही गंभीर होता है

कैसे ये सागर निशदिन

हजारों कस्तियों का बोझ ढोता है

हर रोज बड़ी बड़ी कस्तियाँ 

इसके सीने को चीरते हुए होती हैं पार

छीर है गम्भीर इस्स ना करता इक बार

ये ना चंचल है, ना ठहरा है

बहुत से राज है छिपाए

इसलिये इतना गहरा है।

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